Top 50 Gulzar Shayari In Hindi | 2021 गुलज़ार शायरी हिंदी में

दोस्तों Gulzar Shayari इस आर्टिकल में हम आज आपको Gulzar के कुछ 50 शायरियो के बारे में बताने जा रहे है।  हमे उम्मीद है की आपको हमारा यह ब्लॉग आर्टिकल पसंद आएगा। 

GULZAR SHAYARI

Gulzar Shayari In Hindi 

“ये दोस्ती का गणित है साहब, 

यहाँ दो में से एक गया तो  कुछ नहीं बचता “…..

“चलो अब जाने भी दो क्या करोगे दस्ता सुनकर,

ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयां हमसे होगा नहीं “……

“वो एक रात जला तो उसे चिराग कह दिया,

हम बरसो से जल रहे है कोई तो खिताब दो”…..

“उदास तो बोहोत रहे मगर कभी जाहिर नहीं किया,

ठीक हु ” बस इसी लफ्ज़ ने सब संभल लिया “……

GULZAR SHAYARI

“ऐब भी बोहोत है मुज़मे और खुबिया भी ,

ढूंढने वाले तू सोच तुझे चाहिए क्या मुझसे”……

“आदमी बुलबुला है पानी का,

और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है डूबता भी है फिर उभरता है, फिर से बहता है न समुन्दर निगल सका इसको न तवारिक तोड़ पाई है , वक्त की हथेली पर बहता आदमी बुलबुला है पानी का” …..

GULZAR SHAYARI

“शिकायत मौत से नहीं साहब अपनों से थी,

जरा सी आँखे क्या बंद हुई कब्र खोदने लगे “……

GULZAR SHAYARI

“बचपन वाले खिलोने आवाज़ दे रहे है,

पूछ रहे है कैसा लगता है, जब लोग तुम्हारे साथ खेलते है “….

“खुद कमाने लगे तो, शौक खुद ही कम हो गए। 

पापा कमाते थे तो जहाज भी लेने का मन करता है” ….

“बोहोत छाले है उसके पैरो में,

कमबक्त उसूलो पर चला होगा “….

Top 50 Gulzar Shayari In Hindi

“ख़ुशी कहा हम तो गम चाहते है,

ख़ुशी उन्हें दे दो जिन्हे हम चाहते है “….

“तुम्हारी दुनिया में हमारी कोई कीमत हो या न हो,

मगर हमारी दुनिया में तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता”….

GULZAR SHAYARI

“आखिर कह ही डाला उसने एक दिन, इस कदर टूटे हो बिखर क्यू नहीं जाते ? कब तक जियोगे ये दर्द भरी जिंदगी, किसी रात ख़ामोशी से मर क्यू नहीं जाते “…..

GULZAR SHAYARI
GULZAR SHAYARI

“बहुत गुरुर था छत को छत होने पर,

एक मंजिल और बनी छत फर्श हो गयी” ….

बे वजह घर से निकलने की जरुरत क्या है, मौत से आँखे मिलाने की जरुरत क्या है, सबको मालूम है बाहर की हवा है कातिल, यु ही कातिल से उलझने की जरुरत क्या है।

जिंदगी एक नेमत है उसे संभाल के रखो, क़ब्रगाहो को सजाने की जरुरत क्या है, दिल बहलाने के लिए घर में वजह है काफी, यु हीं गलियों में भटकने की जरुरत क्या है।

GULZAR SHAYARI

“कहते है पत्थर दिल रोया करते,

फिर पहाड़ो से ही क्यों झरने बहा करते है”….. 

“जरुरी नहीं हर ख्वाब पूरा हो,

सोचा तो उसे ही जाता है जो अधूरा हो”…..

“खरीददार बोहोत थे इस दिल के,

बेच देते अगर इसमें तुम न होते”….

“जब कोई आपसे दो कदम पीछे हटे तो उसे उम्रभर खुश रहने की दुआ दे कर चार कदम पीछे हट जाने में ही भलाई है”…..

GULZAR SHAYARI

“घर गुलज़ार, सुने शहर, बस्ती बस्ती में कैद हर हस्ती हो गई,

आज फिर जिंदगी महँगी और दौलत सस्ती हो गई”…

“याददाश का कमजोर होना कोई बुरी बात नहीं जनाब, बोहोत बेचैन रहते है वो लोग जिन्हे हर बात याद रहती है”….

GULZAR SHAYARI

“मैंने परखा है अपनी बदकिस्मती को,

मैं जिसे अपना कह दू वो फिर मेरा नहीं रहता”…

GULZAR SHAYARI

“जिंदगी  का सफर अक्सर ऐसा होता है , पसंद कोई, किस्मत में कोई, बाते किसी और से और दिल में कोई और होता है”

“हमेशा याद रहेगा ये दौर हमको,

क्या खूब तरसे जिंदगी में एक शख्स के लिए”

GULZAR SHAYARI

“सबकी जिंदगी में एक ऐसा शख्स जरूर होता है, जो किस्मत में नहीं, लेकिन दिल और दिमाग में हर वक्त रहता है”….

“कुछ वक्त खामोश हो कर भी देख लिया हमने, फिर मालूम हुआ की लोग सच में भूल जाते है”…

“बर्दाश्त नहीं तुम्हे किसी और देखना, 

बात शक की नहीं हक की है”….

“जहा से शुरू किया था सफर फिर वही खड़े हो गए,

अजनबी थे लो फिर अजनबी हो गए”….

GULZAR SHAYARI

“बदनाम बोहोत हु इस ज़माने में,

तू बता तेरे सुनने में कौनसा किस्सा आया है”…. 

“आज तक बोहोत भरोसे टूटे ,

मगर भरोसा करने की आदत नहीं छूटी”

“आखरी नुकसान था तू जिंदगी का,

तेरे बाद कुछ खोया नहीं”

GULZAR SHAYARI

“जुड़ा तो एक डीएन सांसे भी हो जाती है ,

लेकिन बस शिकाय तो सिर्फ मोहब्बत से होती है”

“बस एक मोड़ गलत मुड़ गया था जनाब, फिर न ही मंजिल मिली, न वापिस घर आया”

GULZAR SHAYARI

“जिंदगी में अक्सर ऐसा होता है, हम जिनके साथ के लिए तरसते है,

वो किसी और को खुश करने में व्यस्त होते है”

GULZAR SHAYARI

“मुद्दतो बाद जब उनसे बात हुई, मैंने कहा कुछ झूठ ही बोल दो,

और वो हस के बोले तुम्हारी याद बहुत आती है” 

“खुशी कहां हम तो गम चाहते है,

खुशी उन्हें दे दो जिन्हे हम चाहते है”

“खुशी ने वादा किया था पांच दिन बाद लौट आएगी,

पर जब हमने जिंदगी की किताब खोलकर देखी तो कमबख्त जिंदगी ही चार दिन की थी”

“सब तारीफ कर रहे थे, अपने अपने प्यार की,

मैंने नींद का बहाना कर के महफ़िल छोड़ दी”

“अच्छा लगता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ,

जैसे कोई सुबह जुडी हो किसी हसीं शाम के साथ”

“प्यार मुझे तेरी सीरत से हुआ था,

वरना सुरते अच्छी बहुत मिली मुझे”

“अगर बात करके सुधार हो सकता है,

तो खामोश रहकर बिगाड़ो मत रिश्ते”

GULZAR SHAYARI

“वो चाय रखी है टेबल पर, इतवार पुराने ले आओ,

हम कह देंगे कल छुट्टी है, तुम यार पुराने ले आओ”

“नजर कैसे आती मै उसे भीड़ में,

बड़ी आम सूरत है मेरी”

“कुछ लोग आये थे मेरा दुःख बाटने,

मई जब खुश हुआ तो खफा हो कर चल दिए”

GULZAR SHAYARI

“छोड़ दिया उसका इंतजार करना हमेशा के लिए,

जब रात गुजर सकती है तो जिंदगी भी गुजर जाएगी”

GULZAR SHAYARI

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धन्यवाद ! 

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